*काशी नगरी*
विश्वनाथ बाबा नगरी , बस स्वर्ग-स्वर्ग , बस स्वर्ग ही है ।
निवसति अद्य नगर जन जो , धन्य-धन्य बस धन्य ही है ।।
दिक् दक्षिण प्रवाहित गंगा , जन-जन की जननी माँ गंगा ।
अद्भुत रूप निखार लुभावन , विरजति शीश पे बाबा संगा ।
दशाश्वमेध विलक्षण लौकिक , भव्य-भव्य बस भव्य ही है ।
निवसति अद्य नगर जन जो , धन्य-धन्य बस धन्य ही है ।।
तीर्थ नगर यह ज्ञान की नगरी , धर्म सनातन साथ धनी ।
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ,
कितने महा-मनीषी जनी ।
नाम महामना मालवीय सबको , श्रव्य-श्रव्य बस श्रव्य ही है ।
निवसति अद्य नगर जन जो , धन्य-धन्य बस धन्य ही है ।।
अद्य नगर त्रय विश्वविद्यालय , विद्यापीठ सम्पूर्णानन्द ।
दिक्-चतुर में जय-जय ,
जय-जय , विद्या का जो महानन्द ।।
अस्सी घाट माँ गंगा आरती , द्रश्य-द्रश्य बस द्रश्य ही है ।
निवसति अद्य नगर जन जो , धन्य-धन्य बस धन्य ही है ।।
द्वादश ज्योतिर्लिंग में नामित ,सर्वनाथ बाबा विश्वनाथ ।
सर्वकार्येषु सर्वदा सर पे जिनके इनका हाथ ।।
मणिकर्णिका भूत भविष्यति , सत्य-गत्य बस सत्य ही है ।
निवसति अद्य नगर जन जो , धन्य-धन्य बस धन्य ही है ।।
दुर्गाकुण्ड में जुटे भक्तजन , आस्था जो माँ में उमड़े ।
संकटमोचन दूर करें , जो भक्तजनों पे संकट घुमड़े ।।
शास्त्री लाल बहादुर जन्मे , धरा रम्य-रम्य बस रम्य ही है ।
रघुबंशमणि दूबे
टीकर , देवरिया
६ अक्टूबर २०२५